झोटवाड़ा में विकास की रफ्तार क्यों बनी चर्चा का विषय झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र पिछले कुछ महीनों से राजस्थान की विकास चर्चा के केंद्र में है। वजह स
झोटवाड़ा में विकास की रफ्तार क्यों बनी चर्चा का विषय
झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र पिछले कुछ महीनों से राजस्थान की विकास चर्चा के केंद्र में है। वजह सिर्फ बजट या योजनाओं की संख्या नहीं, बल्कि विकास के तरीके में आया बदलाव है। ₹113 करोड़ से अधिक के विकास कार्य अब केवल फाइलों या घोषणाओं तक सीमित नहीं दिखते, बल्कि सड़कों, पानी की पाइपलाइनों, स्वास्थ्य सुविधाओं और स्कूल भवनों के रूप में ज़मीन पर नज़र आ रहे हैं।
इस बदलाव के पीछे सबसे अहम कारण है कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की सख्त मॉनिटरिंग शैली, जिसमें योजनाओं की समीक्षा केवल कार्यालय बैठकों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मैदानी निरीक्षण और जवाबदेही पर आधारित होती है।
“काम दिखना चाहिए” — प्रशासन को मिला साफ संदेश
ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में कर्नल राठौड़ ने एक स्पष्ट संदेश दिया—
विकास की सफलता रिपोर्ट से नहीं, जनता के अनुभव से तय होगी।
इसी सोच के तहत पीडब्ल्यूडी, पीएचईडी, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पंचायती राज और पशुपालन विभागों को निर्देश दिए गए कि वे:
- हर सप्ताह फील्ड विज़िट करें
- योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करें
- लंबित कार्यों की स्पष्ट सूची प्रस्तुत करें
यह तरीका झोटवाड़ा में प्रशासनिक संस्कृति को बदलता दिख रहा है—जहाँ अब “काम चल रहा है” कहना पर्याप्त नहीं है।
₹113 करोड़ की सड़क परियोजनाएं: कनेक्टिविटी से जीवन स्तर तक
झोटवाड़ा में ₹113 करोड़ से अधिक की राशि से सड़क निर्माण कार्य केवल आवागमन सुधारने तक सीमित नहीं हैं। इन सड़कों का सीधा असर:
- ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्य बाज़ारों से जोड़ने
- छात्रों की सुरक्षित आवाजाही
- एम्बुलेंस और आपात सेवाओं की तेज़ पहुंच
- स्थानीय व्यापार और रोज़गार के अवसरों
माच्छरखानी, ज्वालामाता मंदिर क्षेत्र, ग्रामीण संपर्क मार्ग और पंचायत स्तर की सड़कों पर विशेष फोकस दिया गया है। यह दर्शाता है कि प्राथमिकता उन्हीं इलाकों को दी जा रही है, जहाँ लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी रही है।
पेयजल पर सख्त रुख: “ग्रामीण पानी के लिए परेशान न हों”
ग्रामीण विकास की सबसे संवेदनशील कड़ी पेयजल होती है। इसी कारण कर्नल राठौड़ ने पीएचईडी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि:
- सभी लंबित जल कनेक्शन शीघ्र पूरे हों
- किसी भी गांव में जल संकट की स्थिति न बने
- जल आपूर्ति की नियमित मॉनिटरिंग हो
यह रुख बताता है कि झोटवाड़ा में विकास केवल संरचनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन की मूल आवश्यकताओं पर केंद्रित है।
स्वास्थ्य और शिक्षा: सड़क के साथ सामाजिक ढांचा भी मजबूत
समीक्षा बैठकों में स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े कार्यों की प्रगति भी अहम एजेंडा रही। क्षेत्र में:
- सैटेलाइट हॉस्पिटल
- CHC सुविधाएं
- स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाओं का निर्माण
- सामुदायिक भवन और गौशाला विकास
जैसे कार्यों की समीक्षा की गई। इससे स्पष्ट होता है कि झोटवाड़ा में विकास को एकतरफा नहीं, बल्कि बहुआयामी दृष्टि से आगे बढ़ाया जा रहा है।
जवाबदेही का नया सिस्टम: सूची, फोटो और समयसीमा
कर्नल राठौड़ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि:
- सभी विकास कार्यों की लिखित सूची बनाई जाए
- पूर्ण और लंबित कार्यों को अलग-अलग चिन्हित किया जाए
- साइट से प्रगति की तस्वीरें उपलब्ध कराई जाएं
यह व्यवस्था इसलिए अहम है क्योंकि इससे विकास की गति पर निरंतर निगरानी बनी रहती है और देरी की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
झोटवाड़ा मॉडल क्या संकेत देता है
झोटवाड़ा में अपनाया गया यह मॉडल राजस्थान की प्रशासनिक कार्यशैली को एक संदेश देता है:
- नियमित समीक्षा
- फील्ड-आधारित निरीक्षण
- विभागीय जवाबदेही
- स्थानीय प्राथमिकताओं पर फोकस
जब ये चारों तत्व एक साथ काम करते हैं, तब विकास सिर्फ योजना नहीं, बल्कि अनुभव बन जाता है।
निष्कर्ष
₹113 करोड़ के विकास कार्य झोटवाड़ा को सिर्फ बेहतर सड़कें या इमारतें नहीं दे रहे, बल्कि विश्वास और भरोसे की नींव रख रहे हैं। कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की सख्त मॉनिटरिंग यह साबित करती है कि जब नेतृत्व ज़मीन से जुड़ा हो, तो विकास की दिशा भी सही होती है।
झोटवाड़ा आज उस बदलाव का उदाहरण बन रहा है, जहाँ घोषणाएं नहीं, परिणाम बोलते हैं।
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जहाँ अनुशासन, जवाबदेही और विकास एक साथ चलते हैं, वही असली सुशासन होता है।
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