क्या राजस्थान का भविष्य नशे की गिरफ्त में खो रहा है? यह एक ऐसा सवाल है जो आज हर माता-पिता और जागरूक नागरिक को परेशान कर रहा है। पिछले 15 दिनों में, र
क्या राजस्थान का भविष्य नशे की गिरफ्त में खो रहा है? यह एक ऐसा सवाल है जो आज हर माता-पिता और जागरूक नागरिक को परेशान कर रहा है। पिछले 15 दिनों में, राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने इस मुद्दे को केवल एक सरकारी समस्या नहीं, बल्कि एक ‘सामाजिक युद्ध’ के रूप में स्वीकार किया है। लाडनूं में आयोजित एक हालिया कार्यक्रम में उनके ‘रेस्क्यू मिशन’ के आह्वान ने पूरे प्रदेश के युवाओं में एक नई ऊर्जा फूंक दी है।
लाडनूं का वह संदेश जिसने सबको झकझोर दिया
लाडनूं और डीडवाना के दौरे के दौरान, कर्नल राठौड़ ने किसी सधे हुए राजनेता की तरह नहीं, बल्कि एक फौजी और बड़े भाई की तरह युवाओं से संवाद किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “नशा केवल एक शरीर को नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार और देश के स्वाभिमान को खत्म करता है।”
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ के विचार आज सोशल मीडिया पर वायरल हैं, क्योंकि उन्होंने युवाओं से सीधे पूछा—”क्या आप अपनी ऊर्जा को नशे की नाली में बहाना चाहते हैं या तिरंगे का मान बढ़ाने में?”
‘नशा मुक्त राजस्थान’ के लिए राठौड़ का 3-पॉइंट रेस्क्यू प्लान
कर्नल राठौड़ ने इस सामाजिक बुराई से लड़ने के लिए एक ठोस रणनीति पेश की है, जिसे नशा मुक्त भारत (Drug-Free India) अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है:
1. खेल को बनाओ ढाल (Sports as a Shield) एक 2004 ओलंपिक रजत पदक विजेता होने के नाते, राठौड़ जानते हैं कि खेल अनुशासन सिखाता है। उन्होंने घोषणा की कि गांवों में खेल सुविधाओं को आधुनिक बनाया जाएगा ताकि युवा खाली समय में नशे की बजाय मैदान की ओर मुड़ें। जयपुर महाखेल जैसे आयोजनों का विस्तार अब ग्रामीण स्तर तक करने की योजना है।
2. पेट में आग और हाथों में काम (Employment over Addiction) मंत्री जी का मानना है कि नशे का एक बड़ा कारण बेरोजगारी और खालीपन है। इसी को ध्यान में रखते हुए, उद्योग और कौशल विकास मंत्रालय के माध्यम से राजस्थान कौशल विकास योजना के तहत 1 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। जब युवाओं के ‘पेट में आग’ सफलता के लिए होगी, तो नशा खुद-ब-खुद पीछे छूट जाएगा।
3. सामुदायिक सतर्कता (Community Vigilance) लाडनूं में उन्होंने स्थानीय निवासियों से आग्रह किया कि वे पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर ‘रेस्क्यू’ टीम की तरह काम करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्थान कैबिनेट मंत्री के रूप में वे खुद इस अभियान की निगरानी कर रहे हैं ताकि नशा बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई हो सके।
सिर्फ भाषण नहीं, धरातल पर एक्शन
पिछले 15 दिनों में कर्नल राठौड़ ने केवल मंचों से बात नहीं की है। डीडवाना में उन्होंने सैनिक कल्याण विभाग के नए कार्यालय का निरीक्षण किया और पूर्व सैनिकों से आग्रह किया कि वे गांवों में युवाओं के लिए ‘मेंटर’ बनें। उनका मानना है कि एक फौजी का अनुशासन ही आज की पीढ़ी को भटकने से बचा सकता है।
इसके साथ ही, झोटवाड़ा विकास योजना के तहत भी वे शिक्षा और जागरूकता केंद्रों के निर्माण पर जोर दे रहे हैं ताकि युवाओं को सही दिशा मिल सके।
युवाओं के लिए कर्नल की सलाह
“अगर आप जीतना चाहते हैं, तो पहले खुद को संभालना होगा।” कर्नल राठौड़ की यह बात आज के राजस्थान समाचार की सबसे बड़ी हेडलाइन है। उन्होंने युवाओं से कहा कि सुविधाएं न होने का बहाना बनाना छोड़ें और अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानें।
कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का ‘लाडनूं रेस्क्यू’ केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि राजस्थान के नौजवानों को बचाने का एक शंखनाद था। यदि हम उनके बताए अनुशासन और कौशल विकास (Skill Development) के रास्ते पर चलते हैं, तो वह दिन दूर नहीं जब राजस्थान का हर युवा नशे से मुक्त और आत्मनिर्भर होगा।
क्या आप इस ‘रेस्क्यू मिशन’ का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं? अपनी राय हमें साझा करें और युवाओं को जागरूक करने के लिए इस लेख को आगे बढ़ाएँ।

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