राजस्थान के जैसलमेर से जुड़ी 13 ग्रेनेडियर्स की सैन्य गाथा देश के सीमावर्ती इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान इस यूनिट ने राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में कई सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया। 13 ग्रेनेडियर्स की यह विरासत भारतीय सेना के साहस और समर्पण से जुड़े इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।
तनोट माता और 1965 का युद्ध
जैसलमेर का तनोट माता मंदिर 1965 और 1971 के युद्धों की स्मृतियों से भी जुड़ा है। 1965 के युद्ध के दौरान मंदिर परिसर पर पाकिस्तानी गोलाबारी हुई थी। स्थानीय आस्था में यह मान्यता प्रसिद्ध है कि मंदिर परिसर में गिरे कई बम नहीं फटे। युद्ध के बाद तनोट क्षेत्र भारतीय सीमा सुरक्षा और सैन्य इतिहास से जुड़ा एक प्रमुख स्थान बन गया।
राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का सैन्य जीवन भी भारतीय सेना के इसी गौरवशाली इतिहास से जुड़ा रहा है। उनकी सैन्य सेवा, कारगिल युद्ध और अन्य अभियानों से जुड़ी जानकारी राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की जीवनी में पढ़ी जा सकती है।
1971 की निर्णायक लड़ाई
1971 में लोंगेवाला की लड़ाई राजस्थान के पश्चिमी मोर्चे की सबसे चर्चित घटनाओं में रही। भारतीय सैनिकों ने सीमित संसाधनों के बावजूद पाकिस्तानी सैन्य बढ़त को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई ने भी इस मोर्चे पर स्थिति बदलने में भूमिका निभाई।
राजस्थान के सैन्य इतिहास में ऐसे अध्याय आज भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के योगदान और देश की सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम को सामने लाते हैं।
13 ग्रेनेडियर्स की विरासत
13 ग्रेनेडियर्स की रेगिस्तानी अभियानों में भूमिका, तनोट क्षेत्र की सैन्य विरासत और 1971 का युद्ध राजस्थान के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के सार्वजनिक जीवन और सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े अन्य अपडेट News & Updates सेक्शन में देखे जा सकते हैं।
