भारतीय सेना में सेवा, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में भूमिका और फिर ओलंपिक के मंच पर भारत के लिए पदक जीतना—कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का सफर कई महत्वपूर्ण पड़ावों से जुड़ा है। सेना में रहते हुए उन्होंने शूटिंग को अपने खेल करियर का हिस्सा बनाया और आगे चलकर 2004 एथेंस ओलंपिक में Double Trap Shooting में सिल्वर मेडल जीता।
राज्यवर्धन राठौड़ के सैन्य और खेल जीवन से जुड़ी जानकारी उनके आधिकारिक About Rajyavardhan Rathore पेज पर भी उपलब्ध है।
सेना में शुरुआत और जम्मू-कश्मीर में सेवा
राज्यवर्धन राठौड़ ने National Defence Academy और Indian Military Academy से प्रशिक्षण प्राप्त किया। सेना में कमीशन मिलने के बाद उन्होंने विभिन्न जिम्मेदारियों के साथ सेवा की। उनके सैन्य करियर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़ा रहा।
सेना की कठिन जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने शूटिंग में भी अपनी क्षमता को आगे बढ़ाया। यही खेल आगे चलकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक लेकर गया।
शूटिंग में बनाई अंतरराष्ट्रीय पहचान
Double Trap Shooting में राठौड़ ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। Commonwealth Games और World Championship जैसी प्रतियोगिताओं में उनके प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय शूटिंग के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल किया।
लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन के बाद उनका अगला बड़ा लक्ष्य Olympic Games था। 2004 में यह लक्ष्य Athens Olympics के रूप में सामने आया।
Athens 2004 में जीता सिल्वर
2004 Athens Olympics में पुरुषों की Double Trap स्पर्धा में राज्यवर्धन राठौड़ ने रजत पदक हासिल किया। यह उपलब्धि भारतीय शूटिंग के लिए महत्वपूर्ण रही और वह व्यक्तिगत स्पर्धा में Olympic silver medal जीतने वाले भारत के पहले खिलाड़ी बने।
इस सफलता ने उन्हें भारतीय खेल इतिहास में एक अलग पहचान दी। सेना की पृष्ठभूमि से आने वाले राठौड़ के लिए यह उपलब्धि उनके लंबे खेल करियर का सबसे बड़ा पड़ाव बनी।
खेलों से जुड़ाव आज भी जारी
ओलंपिक पदक जीतने के बाद भी राज्यवर्धन राठौड़ का खेलों से जुड़ाव बना रहा। राजस्थान में Youth Affairs & Sports से संबंधित उनके कार्यों में खिलाड़ियों, खेल सुविधाओं और प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने से जुड़े विषय शामिल हैं।
राजस्थान में खेलों और खिलाड़ियों से जुड़े कार्यों की जानकारी के लिए आधिकारिक Youth Affairs & Sports पेज देखा जा सकता है। वहीं, खेल और अन्य गतिविधियों के नए अपडेट News & Updates सेक्शन में उपलब्ध होते हैं।
सेना से Olympic Podium तक
राज्यवर्धन राठौड़ की कहानी सेना की सेवा से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय शूटिंग और Olympic podium तक पहुंचती है। जम्मू-कश्मीर में सैन्य सेवा के अनुभव और खेल के प्रति उनकी निरंतर मेहनत ने उनके करियर के अलग-अलग चरणों को जोड़ा।
2004 Athens Olympics का सिल्वर मेडल उनके खेल जीवन की सबसे प्रमुख उपलब्धियों में से एक है और आज भी भारतीय Olympic shooting history में उनका नाम इसी उपलब्धि के साथ दर्ज है।
