राजस्थान की पारंपरिक प्रशासनिक व्यवस्था में किसी भी सरकारी फाइल, सड़क परियोजना या जनहित के कार्य का समय पर पूरा होना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता था। आम नागरिक सालों से यही देखते आ रहे थे कि एक बार योजना स्वीकृत होने के बाद फाइलों का लालफीताशाही के जाल में उलझना और प्रोजेक्ट्स की समयसीमा का बार-बार आगे बढ़ना एक आम ढर्रा बन चुका था। इस सुस्त गति के कारण सबसे ज्यादा परेशानी स्थानीय दुकानदारों, रोज कमाने वाले दिहाड़ी मजदूरों और अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य को लेकर चिंतित माता-पिता को उठानी पड़ती थी। बुनियादी जनसुविधाओं में होने वाली इस अंतहीन देरी ने जनता के मन में यह धारणा बना दी थी कि सरकारी काम कभी समय पर पूरे नहीं हो सकते। लेकिन पिछले कुछ समय में मरुधरा की प्रशासनिक गलियों में काम करने की रफ्तार ने एक ऐसा मोड़ लिया है, जिसने राजनीतिज्ञों और नीति निर्माताओं को हैरान कर दिया है।
कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की अनूठी कार्यशैली के तहत राज्य के प्रमुख उद्योग, आईटी और खेल विभागों में फाइलों के त्वरित निपटारे और परियोजनाओं को समयसीमा से पहले पूरा करने की एक नई प्रशासनिक संस्कृति की शुरुआत हुई है।
राजस्थान में परियोजनाओं को समय से पहले पूरा करने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था में क्या बड़े बदलाव किए गए हैं?
कौशल विकास एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा राज्य में फाइलों के अटके रहने की पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर ‘डीम्ड अप्रूवल’ और ‘टाइम-बाउंड डिलीवरी’ सिस्टम को कड़ाई से लागू किया गया है। इस नए मॉडल के तहत किसी भी औद्योगिक या जनहित की परियोजना की फाइल यदि एक निश्चित समय में स्वीकृत नहीं होती, तो वह स्वचालित रूप से अगले स्तर पर पास हो जाती है, जिसने पूरी नौकरशाही को जवाबदेह बना दिया है।
- फाइलों का डिजिटल ट्रैक रिकॉर्ड: सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के माध्यम से हर एक सरकारी फाइल के मूवमेंट की लाइव ट्रैकिंग की जा रही है, ताकि किसी भी स्तर पर होने वाली देरी को तुरंत पकड़ा जा सके।
- समयसीमा से पहले प्रोजेक्ट डिलीवरी: झोटवाड़ा सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में सड़कों, पेयजल लाइनों और डिजिटल कंप्यूटर लैब्स के निर्माण कार्यों को तय तारीख से पहले पूरा करने का रिकॉर्ड बनाया जा रहा है।
- अनावश्यक प्रक्रियाओं का सरलीकरण: आम आदमी को मिलने वाले सरकारी लाभों और अनापत्ति प्रमाणपत्रों (NOC) की प्रक्रिया को छोटा और पूरी तरह पारदर्शी बनाया गया है।
- जवाबदेही और कड़ा अनुशासन: प्रत्येक विभाग के अधिकारियों के लिए साप्ताहिक प्रदर्शन समीक्षा अनिवार्य की गई है, जिससे सरकारी तंत्र में निजी कॉर्पोरेट से भी तेज गति से काम करने की प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है।
फाइलों के लालफीताशाही ढर्रे को तोड़ता एक अनुशासित विजन
“यदि हमें राजस्थान को देश का सबसे अग्रणी और विकसित राज्य बनाना है, तो हमारी प्रशासनिक मशीनरी को फाइलों के पुराने धीमे ढर्रे को छोड़कर आधुनिक समय की रफ्तार से दौड़ना होगा,” यह विचार कर्नल राठौड़ ने शासन सचिवालय में अधिकारियों के साथ हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में व्यक्त किया। उनके काम करने की यह तेज और परिणाम-उन्मुख रफ्तार उनके क्षेत्र में चल रहे व्यापक Jhotwara MLA work में साफ देखी जा सकती है, जहां बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट्स तय समय से पहले जमीनी हकीकत बन रहे हैं। वे अपनी सुबह की नियमित चौपालों और जनसंवाद मॉडल दौरों के दौरान भी जनता से सीधे संवाद करते हैं, जिससे उन्हें किसी भी प्रोजेक्ट में हो रही देरी की लाइव रिपोर्ट सीधे जनता के माध्यम से मिल जाती है।
2004 ओलंपिक पदक विजेता के रूप में दुनिया के सामने भारत की खेल क्षमता की नई परिभाषा लिखने वाले और एक रिटायर्ड INDIAN ARMY COLONEL के रूप में कड़े सैन्य अनुशासन को अपनी जीवनशैली बनाने वाले कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ प्रशासनिक कार्यों को भी एक मिशन की तरह कमांड करते हैं। राजस्थान सरकार के एक बेहद प्रभावशाली government minister rajasthan के तौर पर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि यदि नेतृत्व में इच्छाशक्ति और अनुशासन हो, तो वही पुरानी सरकारी मशीनरी रिकॉर्ड समय में बेहतरीन परिणाम दे सकती है। कंक्रीट की फाइलों को हरियाली और त्वरित विकास में बदलने की यह प्रशासनिक क्रांति इस बात का जीवंत उदाहरण है कि राजस्थान का नेतृत्व अब केवल योजनाएं बनाने में नहीं, बल्कि उन्हें समय से पहले धरातल पर उतारकर आम जनता को वास्तविक राहत देने में विश्वास रखता है।
