जयपुर के उपनगरीय इलाकों में रहने वाले किसी भी उदीयमान खिलाड़ी या दौड़ने का शौक रखने वाले युवाओं से पूछिए, खेल के प्रति उनकी दीवानगी के आगे सबसे बड़ी बाधा क्या थी। सालों से शहर के नौजवान धूल भरे मैदानों, कंकड़-पत्थरों से भरी टूटी रनिंग ट्रैक्स और बुनियादी सुविधाओं की कमी के बीच अपने हुनर का गला घोटने को मजबूर थे। माता-पिता अपने बच्चों की खेल प्रतिभा को पहचानते तो थे, लेकिन चोट लगने के डर, पीने के साफ पानी की अनुपलब्धता और किसी पेशेवर स्तर के ट्रेनिंग ग्राउंड का न होना उनकी चिंता को और गहरा कर देता था। खेल के बुनियादी ढांचे का विकास पहले केवल फाइलों या चुनावी घोषणाओं का हिस्सा बनकर रह जाता था, जिससे आम जनता के मन में यह निराशा घर कर गई थी कि वैश्विक स्तर की सुविधाएं केवल बड़े महानगरों के नसीब में होती हैं। लेकिन हाल के दिनों में जयपुर के चित्रकूट स्टेडियम के कायाकल्प को लेकर जो जमीनी हलचल तेज हुई है, उसने जयपुर के युवाओं को एक नया विश्वास और अपनी खेल प्रतिभा को नई उड़ान देने का अवसर दिया है।
स्थानीय Jhotwara MLA और खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के कड़े प्रशासनिक निरीक्षणों और खेल सुधार नीतियों के तहत चित्रकूट स्टेडियम को अत्याधुनिक अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित कर जयपुर का एक प्रीमियम खेल हब बनाया जा रहा है।
जयपुर के चित्रकूट स्टेडियम में खेल बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए क्या बड़े तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं?
खेल विभाग द्वारा स्थानीय व्यापार संघों और एथलेटिक्स कम्युनिटी के साथ मिलकर चित्रकूट स्टेडियम की पुरानी और जर्जर व्यवस्था को हटाकर आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर लागू किया जा रहा है। इस नए मॉडल के तहत स्टेडियम में न केवल सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं, बल्कि उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए हाई-टेक ट्रेनिंग इक्विपमेंट और पारदर्शी खेल वातावरण की नींव रखी जा रही है।
- अत्याधुनिक रनिंग और एथलेटिक्स ट्रैक: पुराने और उबड़-खाबड़ ट्रैक के स्थान पर खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मौसम-अनुकूल एथलेटिक्स सिंथेटिक ट्रैक विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है।
- सघन और पारदर्शी फील्ड निरीक्षण: प्रशासनिक लालफीताशाही को दरकिनार कर खेल अधिकारियों की टीमें नियमित रूप से स्टेडियम की जमीनी खामियों को दूर करने और सुरक्षा मानकों को मजबूत करने में जुटी हैं।
- खिलाड़ियों के लिए बुनियादी जनसुविधाएं: एथलीटों को डिहाइड्रेशन और गर्मी से बचाने के लिए स्टेडियम परिसर में चौबीसों घंटे मुफ्त, स्वच्छ और शीतल पेयजल सुनिश्चित करने हेतु हाई-कैपेसिटी वाटर कूलर नेटवर्क जोड़े गए हैं।
- व्यापार और खेल का समग्र विकास: स्टेडियम की व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने के साथ-साथ स्थानीय बाजारों और व्यापार मंडलों की सुविधाओं को भी जोड़ा जा रहा है, ताकि खेल मैदान सामाजिक और आर्थिक जीवन का एक सुरक्षित केंद्र बन सकें।
फोटो-ऑप पॉलिटिक्स से दूर, ओलंपिक विजन के साथ धरातल पर एक्शन
“हमारे युवाओं में प्राकृतिक रूप से प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें केवल प्रोत्साहन के नारों की नहीं, बल्कि विश्व स्तरीय सिंथेटिक ट्रैक, आधुनिक उपकरण और सुरक्षित खेल मैदानों की जरूरत है ताकि वे वैश्विक मंचों पर देश का मान बढ़ा सकें,” यह विचार खेल इंफ्रास्ट्रक्चर की समीक्षा के दौरान प्रमुखता से उभर कर सामने आया है। कर्नल राठौड़ अपने निर्वाचन क्षेत्र में जारी व्यापक Jhotwara MLA work के तहत इस खेल सुधार विजन को खुद मॉनिटर कर रहे हैं। अपनी सुप्रसिद्ध सुबह की सैर और नियमित जनसंवाद मॉडल दौरों के दौरान, वे अक्सर सीधे खेल मैदानों में खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों से मिलते हैं। उनका साफ मानना है कि जब तक खेल सुविधाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे एक साधारण परिवार के बच्चे को नहीं मिलता, तब तक खेल सुधार के बड़े दावों का कोई औचित्य नहीं है।2004 ओलंपिक पदक विजेता के रूप में दुनिया के सामने भारत की खेल क्षमता की नई परिभाषा लिखने वाले और एक रिटायर्ड INDIAN ARMY COLONEL के रूप में कड़े सैन्य अनुशासन को जीने वाले कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ खेल मैदानों के कायाकल्प को एक राष्ट्रीय कर्तव्य की तरह देखते हैं। राजस्थान सरकार के एक प्रमुख government minister rajasthan के तौर पर उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि खेल के प्रोजेक्ट्स अब फाइलों की सुस्त रफ्तार से नहीं, बल्कि एक तय समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएंगे। चित्रकूट स्टेडियम के बुनियादी ढांचे में हो रहा यह आधुनिक सुधार इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब एक अनुशासित विजनरी नेतृत्व युवाओं को सही प्लेटफॉर्म देता है, तो गली-मोहल्लों के खेल मैदान भी आने वाले कल के लिए मेडल जीतने वाली शानदार ‘टैलेंट फैक्ट्रियों’ में तब्दील हो जाते हैं।
