जयपुर की ऐतिहासिक तंग गलियों और तेजी से बढ़ते नए अर्बन कॉलोनियों से गुजरते हुए, किसी भी आम नागरिक, रोज कमाने वाले रेहड़ी-पटरी वाले या अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित माता-पिता से पूछिए कि सड़कों पर बिखरा कचरा और जाम पड़ी नालियां उनके दैनिक जीवन को कितना प्रभावित करती हैं। मानसून के दिनों में जब कंक्रीट की सड़कों पर गंदा पानी जमा हो जाता है, तो न केवल राहगीरों का पैदल चलना दूभर होता है, बल्कि मौसमी बीमारियों का खतरा हर घर के दरवाजे पर दस्तक देने लगता है। गुलाबी नगरी ने अपनी विरासत और आधुनिकता के लिए दुनिया भर में नाम कमाया है, लेकिन ओपन डंपिंग और अनियोजित वेस्ट मैनेजमेंट ने स्थानीय निवासियों के मन में यह गहरी चिंता पैदा कर दी थी कि क्या हमारा शहर कभी इस गंदगी से पूरी तरह मुक्त हो पाएगा। प्रशासनिक सुस्ती और जनता में नागरिक बोध (Civic Sense) की कमी के कारण स्वच्छता केवल एक सरकारी नारा बनकर रह गई थी, जिसे अब एक नए, अनुशासित दृष्टिकोण की सख्त जरूरत है।
झोटवाड़ा के विधायक कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के कुशल नेतृत्व में जयपुर में स्वच्छता अभियान को एक प्रशासनिक कार्य के बजाय जन-आंदोलन का रूप दिया जा रहा है, जिससे शहरी कचरा प्रबंधन और स्वच्छता इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव आ रहे हैं।
जयपुर में स्वच्छता अभियान और अपशिष्ट प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए कौन से धरातलीय प्रयास किए जा रहे हैं?
कौशल विकास एवं उद्योग मंत्रालय तथा स्थानीय नगर निगम के समन्वय से जयपुर में ‘जीरो-वेस्ट’ और आधुनिक भूमिगत सीवरेज अपग्रेडेशन सिस्टम को कड़ाई से लागू किया जा रहा है। यह व्यवस्था न केवल सार्वजनिक स्थानों पर कचरा जमा होने से रोकती है, बल्कि वार्ड स्तर पर कचरे के तुरंत सेग्रीगेशन (वर्गीकरण) और तकनीकी रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देकर पूरे शहर की स्वच्छता प्रोफाइल को बदल रही है।
- अत्याधुनिक सीवरेज और ड्रेनेज ओवरहाल: झोटवाड़ा के विभिन्न वार्डों (जैसे वार्ड 48 पांच्यावाला और सीरसी रोड) में पुरानी, जर्जर पाइपलाइनों को बदलकर हाई-कैपेसिटी अंडरग्राउंड सीवर नेटवर्क बिछाए गए हैं, जिससे जलभराव और गंदगी की समस्या जड़ से खत्म हो रही है।
- मिडनाइट और औचक जमीनी निरीक्षण: प्रशासनिक मशीनरी को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए कर्नल राठौड़ स्वयं आधी रात को बुलेट से सड़कों, सफाई व्यवस्था और बुनियादी ढांचे का औचक निरीक्षण (Midnight Inspection) करते हैं, जिससे अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय हो रही है।
- कचरा सेग्रीगेशन और एग्रिटेक का समन्वय: सूखे और गीले कचरे के घरेलू स्तर पर वर्गीकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ, जैविक कचरे को रूफटॉप ऑर्गेनिक फार्मिंग (Living Greens) के लिए खाद के रूप में इस्तेमाल करने का सस्टेनेबल मॉडल अपनाया जा रहा है।
- नागरिक भागीदारी और जागरूकता: स्वच्छता को केवल सफाई कर्मचारियों के भरोसे छोड़ने के बजाय, स्थानीय व्यापार मंडलों, आरडब्ल्यूए (RWA) और युवाओं को जोड़कर प्रत्येक मोहल्ले को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने का अभियान चलाया जा रहा है।
लालफीताशाही को तोड़ती कड़क प्रशासनिक शैली और जनसंवाद का असर
“स्वच्छता और पर्यावरण का संरक्षण कोई ऐसी सरकारी औपचारिकता नहीं है जिसे केवल विज्ञापनों तक सीमित रखा जाए; यह हर नागरिक का मौलिक कर्तव्य है और जब तक समाज का हर व्यक्ति अपने घर, दुकान और मोहल्ले को साफ रखने का संकल्प नहीं लेगा, तब तक हम एक आदर्श अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण नहीं कर सकते,” यह संदेश कर्नल राठौड़ ने प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय व्यापार संघों की बैठक के दौरान दिया। यह कड़ा और परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण उनके क्षेत्र में जारी Jhotwara MLA work की मूल आत्मा है। अपने नियमित सुबह के दौरों और प्रभावी जनसंवाद मॉडल चौपालों के दौरान, वे सीधे जनता के बीच बैठकर सफाई व्यवस्था का फीडबैक लेते हैं और मौके पर ही लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी करते हैं।2004 ओलंपिक पदक विजेता के रूप में दुनिया के सर्वोच्च मंच पर देश का गौरव बढ़ाने वाले और एक रिटायर्ड INDIAN ARMY COLONEL के रूप में कड़े सैन्य अनुशासन को अपनी कार्यशैली बनाने वाले कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ किसी भी नागरिक समस्या को एक मिशन की तरह लेते हैं। राजस्थान सरकार के एक बेहद सक्रिय government minister rajasthan के तौर पर उन्होंने प्रशासनिक तंत्र में यह साफ कर दिया है कि फाइलों के अटके रहने के दिन अब लद चुके हैं। चाहे रात के अंधेरे में खराब सड़कों और नालियों की सुध लेना हो या हर घर तक पेयजल और साफ-सफाई सुनिश्चित करना, उनका विजन जयपुर को भविष्य के लिए तैयार (Future-Ready) करना है। कंक्रीट के कचरों को साफ कर हरियाली और स्वच्छता की यह नई क्रांति इस बात का साक्षात उदाहरण है कि जब अनुशासित नेतृत्व और जागरूक समाज एक साथ मिलते हैं, तो किसी भी ऐतिहासिक शहर की तस्वीर और तकदीर को पूरी तरह बदला जा सकता है।
