परीक्षा का समय आते ही लाखों छात्रों के मन में एक ही सवाल होता है, क्या मैं कर पाऊँगा? प्रतिस्पर्धा, अपेक्षाएँ और भविष्य की चिंता कई बार आत्मविश्वास क
परीक्षा का समय आते ही लाखों छात्रों के मन में एक ही सवाल होता है, क्या मैं कर पाऊँगा? प्रतिस्पर्धा, अपेक्षाएँ और भविष्य की चिंता कई बार आत्मविश्वास को कमजोर कर देती है। इसी संदर्भ में Rajyavardhan Singh Rathore का संदेश युवाओं के लिए बेहद प्रासंगिक है—“अभी नहीं तो कभी नहीं”।
आज यह संदेश क्यों जरूरी है
आज की शिक्षा व्यवस्था में परीक्षा को जीवन का निर्णायक मोड़ मान लिया गया है। इससे छात्र अपने प्रयासों को कम और परिणामों को ज्यादा महत्व देने लगते हैं। यह मानसिक दबाव लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकता है।
राठौड़ का अनुभव आधारित दृष्टिकोण
एक ओलंपिक पदक विजेता, सेना के पूर्व अधिकारी और वर्तमान कैबिनेट मंत्री होने के नाते, राठौड़ का अनुभव कहता है कि:
- दबाव में लिया गया निर्णय सही नहीं होता
- अनुशासन और धैर्य सबसे बड़ी ताकत हैं
- एक असफलता पूरे जीवन को परिभाषित नहीं करती
उनका संदेश छात्रों को डर से बाहर निकालकर आत्मविश्वास की ओर ले जाता है।
सरकार की युवा-केंद्रित सोच
राजस्थान सरकार की युवा नीतियों में अब मानसिक स्वास्थ्य, खेल और कौशल विकास को समान महत्व दिया जा रहा है। परीक्षा को जीवन की सीख माना जा रहा है, न कि अंतिम फैसला।
युवाओं और अभिभावकों को क्या सीख
युवाओं के लिए यह संदेश है कि वे खुद पर भरोसा रखें। अभिभावकों के लिए यह समझने का अवसर है कि सहयोग, तुलना से कहीं अधिक प्रभावी होता है।
आगे की राह
आज की पीढ़ी को मजबूत बनाने के लिए शिक्षा के साथ-साथ मानसिक संतुलन जरूरी है। “अभी नहीं तो कभी नहीं” का अर्थ है: अपने प्रयास पर विश्वास और डर से मुक्ति।
युवा नीतियों और नेतृत्व दृष्टिकोण को समझने के लिए नागरिक कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी देख सकते हैं।
छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से आग्रह है कि वे परीक्षा को सीख की प्रक्रिया मानें और आत्मविश्वास व संतुलन को प्राथमिकता दें।

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