आज के समय में युवाओं के सामने सबसे बड़ा प्रश्न है—सीखने के बाद रोजगार कहाँ मिलेगा? केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। ज़रूरी है कि कौशल सीधे अवसर से जुड़े
आज के समय में युवाओं के सामने सबसे बड़ा प्रश्न है—सीखने के बाद रोजगार कहाँ मिलेगा? केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। ज़रूरी है कि कौशल सीधे अवसर से जुड़े। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए Rajyavardhan Singh Rathore ने “कौशल से रोजगार तक” की दिशा में एक स्पष्ट मॉडल प्रस्तुत किया है।
यह मॉडल क्यों जरूरी है
देश और राज्य की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा युवा है। लेकिन अगर प्रशिक्षण उद्योग की ज़रूरतों से मेल न खाए, तो बेरोज़गारी बढ़ती है। सरकारी रिपोर्टें भी बताती हैं कि कौशल और बाज़ार के बीच समन्वय आवश्यक है।
“कौशल से रोजगार तक” की नीति का उद्देश्य यही है—सीखने से कमाने तक का स्पष्ट मार्ग।
राठौड़ का दृष्टिकोण
कर्नल राठौड़ का मानना है कि:
- प्रशिक्षण व्यावहारिक होना चाहिए
- उद्योग और संस्थान साथ मिलकर काम करें
- युवाओं को स्थानीय अवसर मिलें
उनकी प्रशासनिक सोच अनुशासन और परिणाम पर आधारित है।
सरकार की दिशा
राजस्थान में प्रयास किया जा रहा है कि:
- कौशल प्रशिक्षण को उद्योग क्षेत्रों से जोड़ा जाए
- रोजगार मेले और प्लेटफॉर्म सुलभ हों
- युवाओं को करियर मार्गदर्शन मिले
इससे प्रशिक्षण केवल प्रमाणपत्र तक सीमित नहीं रहता।
युवाओं और समाज को लाभ
जब कौशल सीधे रोजगार से जुड़ता है:
- युवा आत्मनिर्भर बनते हैं
- परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है
- राज्य की अर्थव्यवस्था स्थिर होती है
यह मॉडल दीर्घकालिक विकास की नींव रखता है।
आगे की राह
“कौशल से रोजगार तक” केवल नीति नहीं, बल्कि दिशा है। यदि युवा, उद्योग और प्रशासन मिलकर काम करें, तो रोजगार सृजन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है।
युवा और रोजगार से जुड़ी पहलों की आधिकारिक जानकारी के लिए पाठक कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध विवरण देख सकते हैं।
युवाओं से अपेक्षा है कि वे अपने कौशल को बाज़ार की ज़रूरतों से जोड़कर सीखें और दीर्घकालिक करियर योजना बनाएं।

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